रविवार, 10 अक्टूबर 2010

सड़क छाप मँजनू

ध्यान देना प्यारे श्रीमती, श्रीमान सड़क छाप मँजनू की सुनाता हूँ दास्तान। निकले हैँ घर से जाने को स्कूल, रास्ते मेँ देख नवयौवना गये रास्ता भूल। गये रास्ता भूल , लड़की को तन्हा पाया। पास जाकर लड़की के कुछ यूँ चक्कर चलया, हाय! हैलो! कर इश्क फरमाया, लड़की ने नजरे उठाकर झुकाया। लड़के को लगा प्रेम का सिग्नल पाया, करके साहस लड़की को हाथ लगाया। छूते ही लड़की को उठा कुछ शोर,
देखा दौड़े चले आ रहेँ लोग इसी ओर। लड़का कुछ समझ पाता भीड़ आ गई पास, लोगोँ के हाथोँ मेँ थे उनके चरणदास। मार-मार कर जूते चप्पल कर दिया बेहाल। तभी दो पुलिस साथ ले आ गये कोतवाल, कर तफ्तीश सारा मामला जाना , जूतोँ की माला पहना ले गये थाना। नाम पता मालूम कर घर खबर भिजबाई, पिता ने आकर जमानत कराई। घर पर छुड़ाकर ले गये जब साथ, पिता ने भी दिखाये दो-चार हाथ , सख्ती से खिलायी ये कसम , किसी लड़की को कभी ना छेड़ेगेँ हम। बुरा लगा हो जिस भाई को, गाली का ना करना दान। सड़क छाप मँजनू की कथा कर दिया बयान।