गुरुवार, 9 सितंबर 2010

दिल

कर दूँ तुझे रुसवा पर दिल इंकार करता हैँ ,
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
     
       थी हसरत की तू मेरी दुल्हन बनेगी ,
       मेरे प्यार के लिए जहाँ से लड़ेगी।

दिवानगी का शय दिल मेँ सवार रहता है
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
    
      हुआ ना मुनासिव तुझे भूल पाना ,
      तेरी यादोँ का मुझको सताना ।

मैँ मुकर जाता पर दिल इकरार करता हैँ ,
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता है।
    
      चले थे दो कदम दिल ने पुकारा ,
      न ले चल मुझे साथ नहीँ ये गवारा।

मैँ न करुँगा इंतजार पर दिल इँतजार करता हैँ ,
क्योकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।

2 टिप्‍पणियां:

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

बहुत खूबसूरत गजल कही हैँ आपने। आभार! -: VISIT MY BLOGS :- जिसको तुम अपना कहते हो यारो..........कविता को पढ़कर तथा Mind and body researches.......ब्लोग को पढ़कर अपने अमूल्य विचार व्यक्त करने के लिए आप सादर आमंत्रित हैँ। आप इन लिँको पर क्लिक कर सकते हैँ।

Amit K Sagar ने कहा…

वाह. शुरुआत ही इतनी उम्दा कि...बहुत सुन्दर लिखा है.
निरंतर लेखन हेतु शुभकामनाएं.
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वात्स्यायन गली