नज्म-ऐ-संसार
शनिवार, 18 दिसंबर 2010
Sansar: दो दिल टूटे , बिखरे टूकड़े सारे
Sansar: दो दिल टूटे , बिखरे टूकड़े सारे
दो दिल टूटे , बिखरे टुकड़े सारे
तड़प तड़प वो दिन कैसे गुजारे
रह रहकर अब दिल मेँ टीस उठती है
इस कदर जैसे कोई खंजर मारे हमारे
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