Sansar: दो दिल टूटे , बिखरे टूकड़े सारे
दो दिल टूटे , बिखरे टुकड़े सारे
तड़प तड़प वो दिन कैसे गुजारे
रह रहकर अब दिल मेँ टीस उठती है
इस कदर जैसे कोई खंजर मारे हमारे
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शनिवार, 18 दिसंबर 2010
बुधवार, 3 नवंबर 2010
बन्द होँठ मय के प्याले
ऐ मुहज्जब हसीना कुछ हिजाब करो;
साकित होकर न तवालत आप सहो;
है फज्ल खुदा का हुनर दिया जिसने;
बन्द होँठ मय के प्याले मय लगता रिसने;
बुझ जाये तस्नाकामी तब नकाब करो;
ऐ मुहज्जब हसीना कुछ हिजाब करो.......
वस्ल के समय खलती नातमामी आपकी;
आती है याद तब 'अश्क' को शराब की;
है इस्तदआ आकर दूर शराब करो;
ऐ मुहज्जब हसीना कुछ हिजाब करो.........
रविवार, 10 अक्टूबर 2010
सड़क छाप मँजनू
ध्यान देना प्यारे श्रीमती, श्रीमान सड़क छाप मँजनू की सुनाता हूँ दास्तान। निकले हैँ घर से जाने को स्कूल, रास्ते मेँ देख नवयौवना गये रास्ता भूल। गये रास्ता भूल , लड़की को तन्हा पाया। पास जाकर लड़की के कुछ यूँ चक्कर चलया, हाय! हैलो! कर इश्क फरमाया, लड़की ने नजरे उठाकर झुकाया। लड़के को लगा प्रेम का सिग्नल पाया, करके साहस लड़की को हाथ लगाया। छूते ही लड़की को उठा कुछ शोर,
देखा दौड़े चले आ रहेँ लोग इसी ओर। लड़का कुछ समझ पाता भीड़ आ गई पास, लोगोँ के हाथोँ मेँ थे उनके चरणदास। मार-मार कर जूते चप्पल कर दिया बेहाल। तभी दो पुलिस साथ ले आ गये कोतवाल, कर तफ्तीश सारा मामला जाना , जूतोँ की माला पहना ले गये थाना। नाम पता मालूम कर घर खबर भिजबाई, पिता ने आकर जमानत कराई। घर पर छुड़ाकर ले गये जब साथ, पिता ने भी दिखाये दो-चार हाथ , सख्ती से खिलायी ये कसम , किसी लड़की को कभी ना छेड़ेगेँ हम। बुरा लगा हो जिस भाई को, गाली का ना करना दान। सड़क छाप मँजनू की कथा कर दिया बयान।
देखा दौड़े चले आ रहेँ लोग इसी ओर। लड़का कुछ समझ पाता भीड़ आ गई पास, लोगोँ के हाथोँ मेँ थे उनके चरणदास। मार-मार कर जूते चप्पल कर दिया बेहाल। तभी दो पुलिस साथ ले आ गये कोतवाल, कर तफ्तीश सारा मामला जाना , जूतोँ की माला पहना ले गये थाना। नाम पता मालूम कर घर खबर भिजबाई, पिता ने आकर जमानत कराई। घर पर छुड़ाकर ले गये जब साथ, पिता ने भी दिखाये दो-चार हाथ , सख्ती से खिलायी ये कसम , किसी लड़की को कभी ना छेड़ेगेँ हम। बुरा लगा हो जिस भाई को, गाली का ना करना दान। सड़क छाप मँजनू की कथा कर दिया बयान।
गुरुवार, 9 सितंबर 2010
दिल
कर दूँ तुझे रुसवा पर दिल इंकार करता हैँ ,
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
थी हसरत की तू मेरी दुल्हन बनेगी ,
मेरे प्यार के लिए जहाँ से लड़ेगी।
दिवानगी का शय दिल मेँ सवार रहता है
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
हुआ ना मुनासिव तुझे भूल पाना ,
तेरी यादोँ का मुझको सताना ।
मैँ मुकर जाता पर दिल इकरार करता हैँ ,
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता है।
चले थे दो कदम दिल ने पुकारा ,
न ले चल मुझे साथ नहीँ ये गवारा।
मैँ न करुँगा इंतजार पर दिल इँतजार करता हैँ ,
क्योकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
थी हसरत की तू मेरी दुल्हन बनेगी ,
मेरे प्यार के लिए जहाँ से लड़ेगी।
दिवानगी का शय दिल मेँ सवार रहता है
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
हुआ ना मुनासिव तुझे भूल पाना ,
तेरी यादोँ का मुझको सताना ।
मैँ मुकर जाता पर दिल इकरार करता हैँ ,
क्योँकि दिल आज भी तुझे प्यार करता है।
चले थे दो कदम दिल ने पुकारा ,
न ले चल मुझे साथ नहीँ ये गवारा।
मैँ न करुँगा इंतजार पर दिल इँतजार करता हैँ ,
क्योकि दिल आज भी तुझे प्यार करता हैँ।
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