ध्यान देना प्यारे श्रीमती, श्रीमान सड़क छाप मँजनू की सुनाता हूँ दास्तान। निकले हैँ घर से जाने को स्कूल, रास्ते मेँ देख नवयौवना गये रास्ता भूल। गये रास्ता भूल , लड़की को तन्हा पाया। पास जाकर लड़की के कुछ यूँ चक्कर चलया, हाय! हैलो! कर इश्क फरमाया, लड़की ने नजरे उठाकर झुकाया। लड़के को लगा प्रेम का सिग्नल पाया, करके साहस लड़की को हाथ लगाया। छूते ही लड़की को उठा कुछ शोर,
देखा दौड़े चले आ रहेँ लोग इसी ओर। लड़का कुछ समझ पाता भीड़ आ गई पास, लोगोँ के हाथोँ मेँ थे उनके चरणदास। मार-मार कर जूते चप्पल कर दिया बेहाल। तभी दो पुलिस साथ ले आ गये कोतवाल, कर तफ्तीश सारा मामला जाना , जूतोँ की माला पहना ले गये थाना। नाम पता मालूम कर घर खबर भिजबाई, पिता ने आकर जमानत कराई। घर पर छुड़ाकर ले गये जब साथ, पिता ने भी दिखाये दो-चार हाथ , सख्ती से खिलायी ये कसम , किसी लड़की को कभी ना छेड़ेगेँ हम। बुरा लगा हो जिस भाई को, गाली का ना करना दान। सड़क छाप मँजनू की कथा कर दिया बयान।
8 टिप्पणियां:
बहुत अच्छा किया जो सडक छाप मंजनू को सबक सिखाया|
बहुत ही लाजबाव व्यंग्य है। आभार । -: VISIT MY BLOG :- ब्लोग पर आईये और पढ़िये अपनी पसन्द की गजलेँ और कवितायेँ।
सोच को शब्द देने का सार्थक एवं प्रशंसनीय प्रयास - शुभकामनाएं
kya bat hai jee. khub likha.narayan narayan
2.5/10
सतही लेखन
कम से कम रचना को कविता की तरह
अलग-अलग पंक्ति में तो लिखें.
ऐसा लगा की कोई कहानी है या आपबीती . अच्छा प्रयास
इस नए सुंदर से ब्लॉग के साथ हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
शानदार प्रयास बधाई और शुभकामनाएँ।
-लेखक (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश') : समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं 1994 से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान- (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जिसमें 05 अक्टूबर, 2010 तक, 4542 रजिस्टर्ड आजीवन कार्यकर्ता राजस्थान के सभी जिलों एवं दिल्ली सहित देश के 17 राज्यों में सेवारत हैं। फोन नं. 0141-2222225 (सायं 7 से 8 बजे), मो. नं. 098285-02666.
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