बन्द होँठ मय के प्याले
ऐ मुहज्जब हसीना कुछ हिजाब करो;
साकित होकर न तवालत आप सहो;
है फज्ल खुदा का हुनर दिया जिसने;
बन्द होँठ मय के प्याले मय लगता रिसने;
बुझ जाये तस्नाकामी तब नकाब करो;
ऐ मुहज्जब हसीना कुछ हिजाब करो.......
वस्ल के समय खलती नातमामी आपकी;
आती है याद तब 'अश्क' को शराब की;
है इस्तदआ आकर दूर शराब करो;
ऐ मुहज्जब हसीना कुछ हिजाब करो.........
1 टिप्पणी:
बढ़िया!
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
-समीर लाल 'समीर'
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